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देहरादून में श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी* 

विजय कुमार बंसल उत्तराखंड ब्यूरो

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 *संत समागम और हरि कथा को जीवन का सर्वोच्च सौभाग्य बताया*

 *सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध*

 *उत्तराखंड में धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं को मिल रहा नया विस्तार*

 *समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण विरोधी कानून को बताया ऐतिहासिक कदम*

 *दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना*

 *राज्य में केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार का कार्य*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आज देहरादून स्थित रेंजर्स ग्राउंड में विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित संतजनों, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम की गरिमा को नमन किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजनों में सम्मिलित होना जीवन का अत्यंत सौभाग्यपूर्ण क्षण होता है। उन्होंने संतों के सानिध्य और उनके मार्गदर्शन को जीवन के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऐसे अवसर व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक शांति की ओर अग्रसर करते हैं।

 मुख्यमंत्री ने कथा व्यास ‘धर्मरत्न’ परमपूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके जीवन को भक्ति, साधना और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराज जी ने अल्पायु में ही श्रीमद्भागवत महापुराण को कंठस्थ कर समाज को आध्यात्मिक दिशा देने का कार्य प्रारंभ कर दिया था, जो अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महाराज जी का अनुशासन और तपस्या समाज के लिए अनुकरणीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य मानवता के कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेष रूप से “प्रियाकांत जू विद्या धन योजना” के माध्यम से बेटियों की शिक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं और समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं।

 मुख्यमंत्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण को आध्यात्मिक चेतना का आधार बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और धर्म का समन्वय प्रस्तुत करता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों का सरल समाधान मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब भौतिकता की दौड़ में मनुष्य मानसिक रूप से अशांत है, ऐसे में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण आंतरिक शांति और आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त करता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों का पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर तथा महाकाल लोक जैसी परियोजनाएं भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित कर रही हैं।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना कर भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के अध्ययन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इसी क्रम में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। साथ ही समानता और न्याय की स्थापना हेतु समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।

उन्होंने अंत में कहा कि सरकार समाज में समरसता, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

इस अवसर पर विभिन्न संत-महात्मा, विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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